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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 26% टैरिफ के लिए कितना तैयार है भारत, भारत किन सेक्टरों पर पड़ेगा प्रभाव?

प्रस्तावना

अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत से आयात किए जाने वाले सामान पर 26% टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह कदम भारत की अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार रणनीति को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, और भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 18% है। ऐसे में इस टैरिफ का प्रभाव व्यापक हो सकता है। यह लेख विस्तार से बताएगा कि भारत इस नए टैरिफ के लिए कितना तैयार है, कौन-कौन से सेक्टर प्रभावित होंगे और इससे भारतीय व्यापार को क्या लाभ या हानि होगी।

ट्रंप के टैरिफ का क्या मतलब है?

टैरिफ एक प्रकार का कर होता है जो किसी देश द्वारा दूसरे देश से आयात किए जाने वाले उत्पादों पर लगाया जाता है। अमेरिका ने भारत से आयातित उत्पादों पर 26% टैरिफ बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह नीति मुख्य रूप से ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ का हिस्सा है, जिसमें अमेरिका उन देशों पर टैरिफ लगाता है जो अमेरिकी उत्पादों पर ऊँचा आयात शुल्क लगाते हैं। भारत के कई उत्पाद पहले से ही अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, और यह नया टैरिफ उन्हें और अधिक प्रभावित कर सकता है।

भारत सरकार की तैयारी

पिछले कुछ महीनों में भारत सरकार ने अपने टैरिफ सिस्टम में कई बदलाव किए हैं। इनमें 8,500 औद्योगिक वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करना शामिल है। इससे अमेरिकी व्हिस्की और हार्ले-डेविडसन मोटरसाइकिलों जैसे उत्पादों पर शुल्क में कटौती हुई है, जो अमेरिका की पुरानी शिकायतों में से एक थी। इसके अलावा, भारत ने संकेत दिया है कि वह अमेरिका से अधिक तेल, LNG और रक्षा उपकरण खरीदेगा, जिससे द्विपक्षीय व्यापार संतुलन बनाए रखा जा सके।

किन सेक्टरों पर पड़ेगा प्रभाव?

1. टेक्सटाइल और गारमेंट इंडस्ट्री

भारत के कपड़ा और गारमेंट उद्योग पर इस टैरिफ का सीधा प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिका भारत से भारी मात्रा में कपड़े और रेडीमेड गारमेंट्स आयात करता है। हालांकि, यह टैरिफ वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों के मुकाबले कम है, जिससे भारतीय उत्पाद प्रतिस्पर्धात्मक बने रह सकते हैं।

2. इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर

भारत अमेरिका को लगभग 14 बिलियन डॉलर मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद निर्यात करता है। टैरिफ बढ़ने से भारत के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद महंगे हो जाएंगे, जिससे उनकी मांग घट सकती है।

3. रत्न और आभूषण उद्योग

भारत का रत्न और आभूषण निर्यात लगभग 9 बिलियन डॉलर का है। अमेरिकी टैरिफ बढ़ने से इस सेक्टर पर गहरा प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि अमेरिका इस उद्योग का एक प्रमुख बाजार है।

4. ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स सेक्टर

ऑटो पार्ट्स और एल्यूमीनियम उत्पादों पर पहले से ही 25% टैरिफ लागू किया गया था। हालांकि, 26% टैरिफ से इस उद्योग पर अधिक दबाव पड़ेगा, जिससे अमेरिका में भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों की बिक्री घट सकती है।

5. फार्मा इंडस्ट्री

भारत अमेरिका को लगभग 9 बिलियन डॉलर की दवाएं निर्यात करता है। अच्छी खबर यह है कि फार्मा सेक्टर को इस टैरिफ से अलग रखा गया है, जिससे यह क्षेत्र सुरक्षित रहेगा।

नुकसान और संभावित चुनौतियाँ

1. निर्यात में गिरावट

अमेरिकी टैरिफ बढ़ने से भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात में 3-3.5% की गिरावट आ सकती है। इससे भारत के छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) पर भी असर पड़ेगा।

2. विदेशी निवेश में कमी

भारत अपनी अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन यदि भारत के उत्पाद महंगे हो जाते हैं, तो विदेशी निवेशक भारत के बजाय अन्य प्रतिस्पर्धी बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं।

3. व्यापार संतुलन पर प्रभाव

भारत का अमेरिका के साथ व्यापार संतुलन फिलहाल सरप्लस में है। लेकिन यदि यह टैरिफ लंबे समय तक लागू रहता है, तो भारत को व्यापार घाटे का सामना करना पड़ सकता है।

भारत के लिए संभावित अवसर

1. नए व्यापार साझेदारों की खोज

भारत को अपने निर्यात के लिए नए बाजारों की तलाश करनी होगी, जैसे कि यूरोप, मिडल ईस्ट और अफ्रीका। कई देशों ने पहले ही भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर चर्चा शुरू कर दी है।

2. घरेलू उत्पादन को बढ़ावा

इस टैरिफ से भारत को आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा। यदि भारत अपने घरेलू बाजार में उत्पादन को बढ़ाए और अन्य देशों के साथ व्यापार संतुलन स्थापित करे, तो यह दीर्घकालिक लाभदायक साबित हो सकता है।

3. डिजिटल और IT सेक्टर का विकास

भारत का डिजिटल और आईटी उद्योग दुनिया में अग्रणी है। इस क्षेत्र में भारत की निर्भरता किसी एक देश पर नहीं है, जिससे यह क्षेत्र अपेक्षाकृत सुरक्षित रहेगा।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की अहमियत

अमेरिका और भारत ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। 2021-22 से 2023-24 तक अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था। भारत अमेरिका से 6.22% आयात करता है और कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 18% है। 2023-24 में भारत का अमेरिका के साथ व्यापार सरप्लस 35.32 बिलियन डॉलर था।

निष्कर्ष

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 26% टैरिफ से भारतीय व्यापार पर मिलाजुला असर पड़ेगा। कुछ सेक्टर प्रभावित होंगे, लेकिन भारत सरकार इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। अमेरिका के साथ भारत के मजबूत व्यापारिक संबंध और भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था इसे इस टैरिफ के प्रभावों से उबरने में मदद कर सकते हैं। भारत को अपनी रणनीति में बदलाव लाकर नए बाजारों की तलाश करनी होगी, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना होगा और व्यापार नीति को और मजबूत करना होगा। यदि भारत इस चुनौती को अवसर में बदलने में सफल होता है, तो वह भविष्य में वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

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